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अयोध्या में क्या बनना चाहिए ?

अयोध्या में क्या बनना चाहिए ? ayodhya me kya banna chahiye वोट करने के लिए यहाँ क्लिक करें - Vote Now सर्वे: अयोध्या में क्या बनना चाहिए, राम मंदिर या बाबरी मज्जिद ? नीचे क्लिक कर अपना वोट दें, क्योंकि सोशल मीडिया की राय पर सरकार भी नज़र रखती है अयोध्या में क्या बनना चाहिए [...]

वल्लभाचार्य के द्वितीय पुत्र विट्ठलनाथ जी को गुंसाई (गोस्वामी) पदवी मिली

इतिहास माना जाता है, श्री वल्लभाचार्य जी को ही गोवर्धन पर्वत पर श्रीनाथ जी की मूर्ति मिली थी। इस सम्प्रदाय की प्रसिद्धि समय के साथ बढ़ती गई। पहली बार वल्लभाचार्य के द्वितीय पुत्र विट्ठलनाथ जी को गुंसाई (गोस्वामी) पदवी मिली तब से उनकी संताने गुसांई कहलाने लगीं। विट्ठलनाथ जी के कुल सात पुत्रों की पूजन [...]

निम्नलिखित लाभ व फल प्राप्त हो सकते है: पुत्र की प्राप्ति, कार्य सिद्धि,

व्रत के फलस्वरूप निम्नलिखित लाभ व फल प्राप्त हो सकते है: पुत्र की प्राप्ति, कार्य सिद्धि, वर प्राप्ति, वधु प्राप्ति, खोया धन मिले, जमीन जायदात मिले, धन मिले, साईं दर्शन, मन की शान्ति, शत्रु शांत होना, व्यापार में वृद्धि, बांझ को भी बच्चे की प्राप्ति हो, इच्छित वास्तु की प्राप्ति, पति का खोया प्रेम मिले, [...]

By | May 31st, 2017|Aarti, KanaNath, Mantra, Nav Nath, Shree Nath Ji|0 Comments

आर्थथ डेवट सिंधंत से निरुण अष्टधत्ता सलाह सिंध्ण की प्राप्ती हो सक्ति

श्री नाथ रहस्या (हिंदी संस्करण) ईश्वर ग्रंथ के साधना दवाने सगुन आर्थथ डेवट सिंधंत से निरुण अष्टधत्ता सलाह सिंध्ण की प्राप्ती हो सक्ति है। ग्रंथ की अंतरगढ़ देवी देवता नाथ सिद्धो से पुजाने वाले कर्म योग, भक्ति योग, का फल्ह हॉग। मंत्र, तंत्र, अनुष्ठान आदि बौद्ध ध्यान यौग, तंत्र सिद्धिद्वार तंत्र योग का योगिक सिद्धांत [...]

By | May 31st, 2017|KanaNath, Katha, Mantra, Nath Samaj, Nav Nath, Shree Nath Ji|0 Comments

समय अथवा अवसर, राग एवं उनके रचियता के आधार पर विभिन्न

जय श्री कृष्णा ॥ जय श्री कृष्णा ॥ यह ब्लाग पुष्टिमार्गीय साहित्य को हिन्दी(देवनागरी) में अंतरजाल पर उपलब्ध कराने का एक छोटा सा प्रयास है। मुख्यतः यहाँ नित्य पाठ एवं स्तोत्र, षोडश ग्रंथ, नित्य सेवा में गाये जाने वाले कीर्तन (मंगला, श्रृंगार, राजभोग, शयन) एवं विविध उत्सवों पर गाये जाने वाले कीर्तन शामिल करने का [...]

By | May 31st, 2017|Aarti, KanaNath, Katha, Mantra, Shree Nath Ji|0 Comments

श्रीनाथजी आगे बढे आ रहे है। तब तो श्रीमद् वल्लभाचार्य

गोलोक धाम में मणिरत्नों से सुशोभित श्रीगोवर्द्धन है। वहाँ गिरिराज की कंदरा में श्री ठाकुरजी गोवर्द्धनाथजी, श्रीस्वामिनीजी और ब्रज भक्तों के साथ रसमयी लीला करते है। वह नित्य लीला है। वहाँ आचार्य जी महाप्रभु श्री वल्लभाधीश श्री ठाकुरजी की सदा सर्वदा सेवा करते है। एक बार श्री ठाकुरजी ने श्री वल्लभाचार्य महाप्रभु को देवी जीवों [...]

By | May 31st, 2017|Aarti, KanaNath, Mantra, Nav Nath, Shree Nath Ji|0 Comments

ना कोई भ्राँत ‍लाऊँगा, अजर अमर का गोला गेरूँ पर्वत पहाड़ उठाऊँगा

गोरखनाथ का प्रिय मंत्र 'जंजीरा' ऊँ गुरुजी मैं सरभंगी सबका संगी, दूध-माँस का इकरंगी, अमर में एक तमर दरसे, तमर में एक झाँई, झाँई में पड़झाँई, दर से वहाँ दर से मेरा साईं, मूल चक्र सरभंग का आसन, कुण सरभंग से न्यारा है, वाहि मेरा श्याम विराजे ब्रह्म तंत्र ते न्यारा है, औघड़ का चेला, [...]

थोड़ा सो जाना चाहिए और थोड़ा खाना चाहिए शुरुआत में शिष्य इस तरह

गोरख - हे भगवान (स्वामी), आप मास्टर गुरु हैं (सत्गुरु गोसैन), और मैं एक शिष्य हूं: क्या मैं एक प्रश्न रख सकता हूं, जिसे आप उत्तर दें और न ही प्रत्युत्तर दें? इसके साथ शुरू करने के लिए, शिष्य को उसके सामने आदर्श क्या चाहिए (लाख)? मुझे बताओ कि आप सच्चे शिक्षक हैं। मैकेंद्रेंड - [...]

By | May 31st, 2017|Aarti, Guru GorakhNath Ji|0 Comments

Goraksanath. Goraksa kahai suna hare avadhu

Gorakh Vani   Maro ve jogi maro,Marana hai mitha | Tisa marani maro jisa,Marani gorakha mari ditha || O Yogi die; die to the world(being absorbed in the yogic state of deep trance). Such death is sweet. Die in the manner of Goraksa who ‘died’ (to the world) and then saw the Invisible. Habaki na [...]

गोरक्षनाथ की कथायें बडे सुचारु रुप से मिलती

नाथ सम्प्रदाय का परिचय यह सम्प्रदाय भारत का परम प्राचीन, उदार, ऊँच-नीच की भावना से परे एंव अवधूत अथवा योगियों का सम्प्रदाय है।इसका आरम्भ आदिनाथ शंकर से हुआ है और इसका वर्तमान रुप देने वाले योगाचार्य बालयति श्री गोरक्षनाथ भगवान शंकर के अवतार हुए है। इनके प्रादुर्भाव और अवसान का कोई लेख अब तक प्राप्त [...]

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