माता दी कहते जाओ …!!! मैं आशा करता हूं कि इस प्रकार

A B C आती है क्या…..?????अगर आती भी होगी तो ऐसी नहीं आती होगी ….. क्योंकि ऎसी आज तक आपको किसी ने नहीं सिखाई होगी ..🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🙏A=अम्बे 👣 🙏B=भवानी 👣 🙏C=चामुंडा 👣 🙏D=दुर्गा 👣 🙏E=एकरूपी 👣 🙏F=फरसाधारणी 👣 🙏G=गायत्री 👣 🙏H=हिंगलाज 👣 🙏I=इंद्राणी 👣 🙏J=जगदंबा 👣 🙏K=काली 👣 🙏L=लक्ष्मी 👣 🙏M=महामाया 👣 🙏N=नारायणी 👣 🙏O=ॐकारणी 👣 🙏P=पद्मा👣 🙏Q=कात्यायनी 🙏R=रत्नप्रिया 👣 🙏S=शीतला 👣 🙏T=त्रिपुरासुंदरी 👣 🙏U=उमा 👣 🙏V=वैष्णवी 👣 🙏W=वराही 👣 🙏Y=यति 👣 🙏Z=ज़य्वाना 👣 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🌸🌸🌸 ABCD पढ़ते जाओ ..जय माता दी कहते जाओ …!!! मैं आशा करता हूं कि इस प्रकार की शुभकामना आपको किसी और से न मिली होगी … 🚩जय माँ अम्बे 🚩⛳🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚⛳सारे बोलो जय माता दी 🚩मिलकर बोलो जय माता दी 🚩जोर से बोलो जय माता दी 🚩आप भी बोलो जय माता दी 🚩हम भी बोलेजय माता दी 🚩प्यार से बोलो जय माता दी 🚩सबसे बुलवाओ जय माता दी 🚩सुबह भी बोलो जय माता दी 🚩शाम भी बोलो जय माता दी 🚩दोपहर में बोलो जय माता दी 🚩रात में बोलो जय माता दी 🚩हर समय बोलो जय माता दी 🚩अब तो बोलो जय माता दी 🚩जय माता दी 🚩जय माता दी 🚩⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳जयकारा शेरावाली का शेर पे सवार होके आजा शेरावालिये 🚩बोल सच्चे की जय 🚩🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏ये मेसेज माता रानी के दरबार से चला है इसे आगे भेजो प्लीज कड़ी मत तोड़ना।।

परिवर्तन देखिये 1. पहले शादियों में घर की औरतें खाना बनाती थीं और नाचने वाली बाहर से आती थीं। अब खाना बनाने वाले बाहर से आते हैं और घर की औरतें नाचती हैं। 2- पहले लोग घर के दरवाजे पर एक आदमी तैनात करते थे ताकि कोई कुत्ता घर में न घुस जाये। आजकल घर के दरवाजे पर कुत्ता तैनात करते हैं ताकि कोई आदमी घर में न घुस जाए। 3- पहले आदमी खाना घर में खाता था और लैट्रीन घर के बाहर करने जाता था। अब खाना बाहर खाता है और लैट्रीन घर में करता है। 4- पहले आदमी साइकिल चलाता था और गरीब समझा जाता था। अब आदमी कार से ज़िम जाता है साइकिल चलाने के लिए। चारों महत्वपुर्ण बदलाव हैं ! वाह रे मानव तेरा स्वभाव…. ।। लाश को हाथ लगाता है तो नहाता है … पर बेजुबान जीव को मार के खाता है ।। यह मंदिर-मस्ज़िद भी क्या गजब की जगह है दोस्तो. जंहा गरीब बाहर और अमीर अंदर ‘भीख’ मांगता है.. विचित्र दुनिया का कठोर सत्य.. बारात मे दुल्हे सबसे पीछे और दुनिया आगे चलती है, मय्यत मे जनाजा आगे और दुनिया पीछे चलती है.. यानि दुनिया खुशी मे आगे और दुख मे पीछे हो जाती है..! अजब तेरी दुनिया गज़ब तेरा खेल मोमबत्ती जलाकर मुर्दों को याद करना और मोमबत्ती बुझाकर जन्मदिन मनाना… Wah re duniya !!!!! ✴ लाइन छोटी है,पर मतलब बहुत बड़ा है ~ उम्र भर उठाया बोझ उस कील ने … और लोग तारीफ़ तस्वीर की करते रहे .. 〰〰〰〰〰〰 ✴ पायल हज़ारो रूपये में आती है, पर पैरो में पहनी जाती है और….. बिंदी 1 रूपये में आती है मगर माथे पर सजाई जाती है इसलिए कीमत मायने नहीं रखती उसका कृत्य मायने रखता हैं. 〰〰〰〰〰〰 ✴ एक किताबघर में पड़ी गीता और कुरान आपस में कभी नहीं लड़ते, और जो उनके लिए लड़ते हैं वो कभी उन दोनों को नहीं पढ़ते…. 〰〰〰〰〰〰〰〰 ✴ नमक की तरह कड़वा ज्ञान देने वाला ही सच्चा मित्र होता है, मिठी बात करने वाले तो चापलुस भी होते है। इतिहास गवाह है की आज तक कभी नमक में कीड़े नहीं पड़े। और मिठाई में तो अक़्सर कीड़े पड़ जाया करते है… 〰〰〰〰〰〰〰 ✴ अच्छे मार्ग पर कोई व्यक्ति नही जाता पर बुरे मार्ग पर सभी जाते है…… इसीलिये दारू बेचने वाला कहीं नही जाता , पर दूध बेचने वाले को घर-घर गली -गली , कोने- कोने जाना पड़ता है । 〰〰〰〰〰〰〰〰 ✴ दूध वाले से बार -बार पूछा जाता है कि पानी तो नही डाला ? पर दारू मे खुद हाथो से पानी मिला-मिला कर पीते है । Very nice line इंसान की समझ सिर्फ इतनी हैं कि उसे “जानवर” कहो तो नाराज हो जाता हैं और

“शेर” कहो तो खुश हो जाता हैं! जबकि शेर भी जानवर का ही नाम है शेयर जरूर करें

(((((((((( आत्मवेत्ता संत )))))))))) . दो संन्यासी युवक यात्रा करते-करते किसी गाँव में पहुँचे। . लोगों से पूछा हमें एक रात्रि यहाँ रहना है किसी पवित्र परिवार का घर दिखाओ . लोगों ने बताया कि वहा एक चाचा का घर है। साधु-महात्माओं का आदर सत्कार करते हैं। . अखिल ब्रह्माण्डमां एक तुं श्रीहरि’ का पाठ उनका पक्का हो गया है। वहाँ आपको ठीक रहेगा। . उन्होंने उन सज्जन चाचा का पता बताया। दोनों संन्यासी वहाँ गये। . चाचा ने प्रेम से सत्कार किया, भोजन कराया और रात्रि-विश्राम के लिए बिछौना दिया। . रात्रि को कथा-वार्ता के दौरान एक संन्यासी ने प्रश्न कियाः की आपने कितने तीर्थों में स्नान किया है ? . कितनी तीर्थयात्राएँ की हैं। ? . हमने तो चारों धाम की तीन-तीन बार यात्रा की है। . चाचा ने कहा.. मैंने एक भी तीर्थ का दर्शन या स्नान नहीं किया है। . यहीं रहकर भगवान का भजन करता हूँ और आप जैसे भगवत्स्वरूप अतिथि पधारते हैं तो सेवा करने का मौका पा लेता हूँ। . अभी तक कहीं भी नहीं गया हूँ। . दोनों संन्यासी आपस में विचार करने लगेः ऐसे व्यक्ति का अन्न खाया ! . अब यहाँ से चले जायें तो रात्रि कहाँ बितायेंगे ? यकायक चले जायें तो उसको दुःख भी होगा। चलो, कैसे भी करके इस विचित्र वृद्ध के यहाँ रात्रि बिता दें। . जिसने एक भी तीर्थ नहीं किया उसका अन्न खा लिया, हाय ! आदि-आदि। . इस प्रकार विचारते हुए वे सोने लगे लेकिन नींद कैसे आवे ! . करवटें बदलते-बदलते मध्यरात्रि हुई। . इतने में द्वार से बाहर देखा तो गौ के गोबर से लीपे हुए बरामदे में एक काली गाय आयी…. फिर दूसरी आयी…. तीसरी, चौथी…. पाँचवीं… ऐसा करते-करते कई गायें आयीं। . हरेक गाय वहाँ आती, बरामदे में लोटपोट होती और सफेद हो जाती तब अदृश्य हो जाती। . ऐसी कितनी ही काली गायें आयीं और सफेद होकर विदा हो गयीं। . दोनों संन्यासी फटी आँखों से देखते ही रह गये। वे दंग रह गये कि यह क्या कौतुक हो रहा है ! . आखिरी गाय जाने की तैयारी में थी तो उन्होंने उसे प्रणाम करके पूछाः . हे गौ माता ! आप कौन हो और यहाँ कैसे आना हुआ ? . यहाँ आकर आप श्वेतवर्ण हो जाती हो इसमें क्या रहस्य है ? कृपा करके आपका परिचय दें। . गाय बोलने लगीः हम गायों के रूप में सब तीर्थ हैं। लोग हममें गंगे हर… यमुने हर…. नर्मदे हर… आदि बोलकर गोता लगाते हैं। . हममें अपने पाप धोकर पुण्यात्मा होकर जाते हैं और हम उनके पापों की कालिमा मिटाने के लिए द्वन्द्व-मोह से विनिर्मुक्त आत्मज्ञानी, आत्मा-परमात्मा में विश्रान्ति पाये हुए सत्पुरूषों के आँगन में आकर पवित्र हो जाते हैं। . हमारा काला बदन पुनः श्वेत हो जाता है। . तुम लोग जिनको अशिक्षित, गँवार, बूढ़ा समझते हो वे बुजुर्ग के जहाँ से तमाम विद्याएँ निकलती हैं…. उस आत्मदेव में विश्रान्ति पाये हुए आत्मवेत्ता संत हैं। . तीर्थी कुर्वन्ति जगतीं…. . ऐसे आत्मारामी ब्रह्मवेत्ता महापुरुष जगत को तीर्थरूप बना देते हैं। . अपनी दृष्टि से, संकल्प से, संग से जन-साधारण को उन्नत कर देते हैं। . ऐसे पुरुष जहाँ ठहरते हैं, उस जगह को भी तीर्थ बना देते हैं। ~~~~~~~~ (((((((((( जय जय श्री राधे )))))))))) ~~~~~~~~ .
8:51 PM
तुलसी की दो प्रमुख सेवायें हैं प्रथम सेवा –> तुलसी की जड़ो में … प्रतिदिन जल अर्पण करते रहना !केवल एकादशी को छोड़ कर। द्वितीय सेवा –> तुलसी की मंजरियों को तोड़कर तुलसी को पीड़ा मुक्त करते रहना , क्योंकि ~ ये मंजरियाँ तुलसी जी को बीमार करके सुखा देती हैं ! जब तक ये मंजरियाँ तुलसी जी के शीश पर रहती हैं , तब तक तुलसी माता घोर कष्ट पाती हैं ! इन दो सेवाओं को … श्री ठाकुर जी की सेवा से कम नहीं माना गया है ! इनमें कुछ सावधानियाँ रखने की आवश्यक्ता है ! जैसे ~ तुलसी दल तोड़ने से पहले तुलसीजी की आज्ञा ले लेनी चाहिए ! सच्चा वैष्णव बिना आज्ञा लिए … तुलसी दल को स्पर्श भी नहीं करता है ! रविवार और द्वादशी के दिन तुलसी दल को नहीं तोड़ना चाहिए , तथा कभी भी नाखूनों से तुलसी दल को नहीं तोड़ना चाहिए ! न ही एकादशी को जल देना चाहिये क्यो की इस दिन तुलसी महारानी भी ठाकुर जी के लिये निर्जल व्रत रखती हैं।ऐसा करने से महापाप लगता है ! कारण –> तुलसीजी श्री ठाकुर जी की आज्ञा से केवल इन्ही दो दिनों विश्राम और निंद्रा लेती हैं ! बाकी के दिनों में वो एक छण के लिए भी सोती नही हैं और ना ही विश्राम लेती हैं ! आठों पहर ठाकुर जी की ही … सेवा में लगी रहती हैं !! जय जय श्रीराधे कृष्ण🙏🙏
9:05 PM
योगी रामनाथ गेला रावल ने भेजा है आपको ये अदभुत message 👉 9:06 PM
तुलसीदासजी ने कहा है कि राम दूरि माया बढ़ति घटति जानि मन माँह । भूरि होति रबि दूर लखि सिर पर पगतर छाँह ।। भावार्थ ÷ जैसे सूर्य को दूर देखकर छाया लम्बी हो जाती है और सूर्य जब शिरपर आ जाता है तब छाँह पैरोंके नीचे आ जाती है । उसी प्रकार श्रीरामजीसे दूर रहनेपर माया बढ़ती है और जब वह श्रीरामजीको मनमें बिराजित जानती है तब घट जाती है । जिनके मन मष्तिष्क में भगवान् बिराज रहे है उनको माया एवं संसारी दुःख प्रभावित नही कर सकते । साहिब सीतानाथ सों जब घटिहै अनुराग । तुलसी तबहीं भालतें भभरि भागिहैं भाग ।। भावार्थ ÷ तुलसीदासजी कहते है कि जब स्वामी श्रीजानकीनाथजीसे प्रेम घट जायगा , तब उस आदमीके मस्तकसे सौभाग्य तुरंत ही विकल होकर भाग जायगा ( अर्थात जो मनुष्य भगवान् श्रीरामसे बिमुख हो जाता है, उसका सारा सुख — सौभाग्य नष्ट हो जाता है )

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