#सच्ची_भक्ति एक पंडित थे, वे हमेशा घर-घर जाकर भागवत गीता का

एक साहब मिले… कहने लगे-

☘☘☘☘☘☘☘☘☘☘☘ 🙏🙏 🙏🙏 जय गोरक्षनाथ जय गोरक्ष सेना ============================ 🌹🌹आदरणीय समाज बंधुओं आदेश आदेश सादर प्रणाम🌹🌹 ♦♦♦♦♦♦♦♦♦♦ आदरणीय समाज बंधुओं आपको यह जानकर अत्यंत हर्ष होगा राजस्थान में गोरक्ष सेना आगे बढ़ती हुई जा रही हैं और इसका प्रमाण हैं :::—– गोरक्ष सेना के तत्वावधान में राजस्थान का ही नहीं भारतवर्ष का प्रथम नाथ योगी समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन राजस्थान प्रदेश के जिलाशाखा सवाई माधोपुर के नेतृत्व में चौथ का बरवाड़ा जिला सवाई माधोपुर में सामुहिक विवाह सम्मेलन दिनांक 30 -04-2018 को आयोजित किया जा रहा हैं। जिसकी कार्यकारिणी पूर्व में घोषित की जा चुकी हैं। जिसकी आज गणेश निमंत्रण के साथ विधिवत शुरुआत कर दि गई हैं।आज गणेश निमंत्रण में सम्मेलन समिति के निम्न पदाधिकारी गणेश निमंत्रण में मौजूद रहे 🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏 आचार्य श्रीमान चर्पट नाथ जी ग्राम झडकोन्द 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 श्रीमान जगदीश जी योगी अध्यापक ग्राम डिडवाडी सम्मेलन समिति संयोजक 🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 श्रीमान हनुमान प्रसाद योगी ग्राम रतनपुरा सम्मेलन समिति अध्यक्ष 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 श्रीमान हरीश योगी ग्राम सूरवाल गोरक्ष सेना जिलाध्यक्ष 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 श्रीमान रामलाल नाथ जी ग्राम पावडेरा अखाड़ा निर्माण समिति अध्यक्ष व सम्मेलन समिति उपाध्यक्ष 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 श्री रामविलास योगी ग्राम गुणसीला सह कोषाध्यक्ष 🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 श्री चौथमल योगी ग्राम बलरिया पंजीयन प्रभारी 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 योगी सुरेश बलडा ग्राम विजयपुरा गोरक्ष सेना जिला महामंत्री व सम्मेलन समिति मीडिया प्रभारी आदि मौजूद रहे। 🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼 सभी पदाधिकारियों ने भगवान विघ्नहरण कर्ता भगवान त्रिनेत्र गणेश जी महाराज एवं मां चौथ भवानी से प्राथर्ना की की यह सम्मेलन बिना किसी विघ्न के संम्पन् हो। ========================== अतः सभी समाज बंधुओं से निवेदन हैं कि अधिक से अधिक जोड़े व तन मन और धन से सहयोग प्रदान करने की कृपा करें।
7:06 AM
गोरख सेना नाथ योगी समाज का प्रथम सामूहिक विवाह सम्मेलन चौथ का बरवाड़ा मैं अखिल भारतीय मीणा समाज धर्मशाला मैं दिनांक 30 अप्रैल 2018 को रखा गया आज दिनांक 21 मार्च 2018 को गोरख सेना के कार्यकर्ताओं ने रणथंबोर में विराजमान श्री श्री गजानंद गणेश रिद्धि सिद्धि के दाता को न्योता देकर गणेश जी गणेश जी महाराज की अद्भुत अखाड़ा चौथ का बरवाड़ा कार्यालय में स्थापना की और प्रचार प्रसार किया समाज के सभी बंधुओं से आग्रह है की कार्यालय चौथ का बरवाड़ा अद्भुत अखाड़ा में विवाह पंजीयन करवा सकते हैं पंजीयन
“ई मोदी कुछो नहीं करता है । अबकी बार bjp को वोट नहीं दूंगा।”😤 सच कहूँ तो मेरे से रहा नहीं गया , मैंने पूछा- “आप मोदी से क्या चाहते थे जो आपको नहीं मिला..?” साहब मेरे सवाल से अचकचा गए । अचकचा मतलब समझे ? अचकचा मतलब है असहज होना… साहब चुप…😷😷 फिर मैंने कहा- “उज्जवला योजना , दीनदयाल ज्योतिर्ग्राम योजना , जीएसटी , वन रैंक वन पेंशन , अटल पेंशन योजना , प्रधानमंत्री बीमा योजना , बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ , शौचालय निर्माण , स्वच्छता अभियान , एक दिन में 30 किलोमीटर हाईवे बनना , दुनिया भर में भारत की धमक , मुद्रा योजना , स्टार्टअप योजना , प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान योजना और क्या चाहिए ?? साहब कहने लगे- “ये सब तो ठीक है लेकिन अपना काम धंधा तो चौपट है।” मैंने कहा- “खुल कर कहो न की अब = दो नम्बर के काम करने से डर लगता है, = कैश ट्रांजेक्शन करने में डर लगता है, = पारदर्शिता से डर लगता है, = कहीं बेनामी संपत्ति खरीदने में डर लगता है , = बैंक ट्रांजेक्शन ज्यादा हुआ तो = इन्कमटैक्स से डर लगता है , पैसा कमाओ करोड़ों में और टेक्स भरो सैकडों में…?? साहब चुप…😷😷 साहब के साथ बैठे लड़के ने कहा- ” भैया इतना सब तो ठीक है लेकिन मोदी बेकार आदमी है , करता धरता कुछ है नहीं, बस फेंकता बहुत है ।” मैंने लड़के से कहा- “अच्छा एक बात बताओ… 12 रुपया में दो लाख का दुर्घटना बीमा… मात्र 330 रु में दो लाख का जीवन बीमा हो रहा है , कराया या नहीं … ?” लड़का चुप..😷 मैंने कहा- “घर में जो शौचालय बनवाया उसका उपयोग करते हो ?” लड़का चुप ! “आयुष्मान योजना के बारे में सुना है ?” लड़का चुप…😷😷 . . . कुल मिलाकर साहब और उनके लड़के जैसे लोग कीचड़ में रहने के आदी हैं… अखिलेश की गुंडा सरकार… मायावती की जातिवादी सरकार… ममता की जेहादी सरकार… लालू की भ्रष्टाचारी सरकार… इन सबसे बढ़कर कांग्रेस की ‘हिंदू विरोधी’ सरकार में रहने की आदत इतनी जल्दी बदलने वाली नहीं है। सरकारी कर्मचारी इसलिए नाखुश है कि हराम की कमाई बन्द हो गई अब duty में काम करना पड़ रहा है । पैसे वाले इसलिए नाराज हैं कि ट्रांसपेरेंसी के चलते ब्लैकमनी संभालना मुश्किल है। मिडिल क्लास इसलिए नाराज है कि इतनी जल्दी सब काम क्यों हो रहा है। गरीब इसलिए नाराज है कि जब सब नाराज हैं, तो भैया हम भी नाराज हो लेते हैं…😅
8:33 PM
मंदिर में नारियल तोड़ना ये बताता है कि सबसे पहले हम नारियल की जटा हटाते है,,ये जटा है हमारी इच्छाएं , जिन्हें सबसे पहले हटाना है फिर उसका कठोर हिस्सा तोड़ते है…..ये है हमारा अहंकार, जिसे हटाना बहुत जरुरी है फिर निकलता है पानी,,,ये हमारे अंदर के नकारात्मक विचार है जिनके निकल जाने के बाद फिर आती है प्योर सफ़ेद गिरी जो आत्मा का प्रतीक है… बिना इच्छा,,अहंकार,,और नकारात्मक सोच हटाये हम परमात्मा से नहीं मिल सकते सुप्रभात आपका दिन मंगलमय हो*
#सच्ची_भक्ति एक पंडित थे, वे हमेशा घर-घर जाकर भागवत गीता का पाठ करते थे |एक बार हुआ यू कि एक दिन उन्हें किसी चोर ने पकड़ लिया और कहने लगा तुम्हारे पास जो कुछ भी है वह सब मुझे दे दो , पंडित जी उनकी बात सुन कहने लगे बेटा मेरे पास तो कुछ भी नहीं है, पर तुम एक काम कर सकते हो | मैं यहीं पास के घर मैं भगवत गीता का पाठ करता हूँ | वहाँ जो यजमान है वे बहुत दानी हैं, जब मैं वहा उनको कथा सुना रहा होऊंगा तब तुम उनके घर जाना और तुम्हें जो भी चाहिये वो ले जाना | चोर को यह सुझाव ठीक लगा और उस चोर मे पंडित की बात मान ली. जब अगले दिन पंडित जी उस यजमान के यहा कथा सुना रहे थे, तब वह चोर भी वहां आ पहुंचा | उस वक्त पंडित जी कथा मे कह रहे थे कि यहाँ से मीलों दूर एक गाँव है जिसका नाम वृन्दावन है, वहां एक बालक रहता है, जिसका नाम कन्हैया है, वह हमेशा आभूषणो रत्न से लदा रहता है, यदि कोई उसे लूटना चाहे तो आसानी से उसे लूट सकता है, क्योंकि वह रोज रात गांव के एक पीपल पेड़ के नीचे आता है। वहा एक घनी झाडियाे का झुंड है | यह बात वह चोर ने सुना और उसके मन मे एक लालच हुई कि क्यों न उस बालक को लूट लू जिसके पास इतने आभूषण है और खुशी खुशी वह वहा से वृन्दावन के लिये वहां से चला गया! चोर पहले अपने घर गया और अपनी धर्मपत्नी से कहने लगा कि आज मैं एक कन्हैयानाम के बच्चे को लूटने जा रहा हूँ , मुझे रास्ते मे कुछ खाने के लिए बांध कर दे दो, उसकी पत्नी ने उसे सत्तू को बांधकर दे दिया और कहने लगी बस यही है जो कुछ भी है| अपनी पत्नी की बात सुन चोर ने घर से संकल्प लेकर चला कि जब तक तो में उस कन्हैया को लूट नही लुंगा तब तक नही आऊंगा, यह संकल्प ले वह चोर पैदल-पैदल वृंदावन के लिए चल पड़ा, वह चोर पूरे रास्ते बस कान्हा का नाम लेते और कान्हा के बारे मे सोचते हुए चलते गया, जब वह अगले दिन शाम को वृन्दावन पहुंचा तो वह उस स्थान को ढुंढने लगा जो उस पंडित जी ने बताई थी! वह चोर ढंढते हुए उस जगह पर पहुँच गया औ सोचने लगा कि यदि मैं ऐसे ही खड़े होकर उस कन्हैया का इंतजार करूंगा तो वह मुझे देखकर भाग जायेगा | और मेरा यहाँ आना व्यर्थ हो जायेगा, यह सोच वह झाड़ियों में जाकर झुप गया, जैसे ही वह झाड़ियों में गया झाड़ियों के कांटे उसे चुभने लगे! और उसके मुह से दर्द के कारण कन्हैया का ही नाम निकला उस चोर के शरीर रक्त निकलने लगा और जबान पर सिर्फ कन्हैया का ही नाम आने लगा, वह चोर लगी बैठ कहने लगा आ जाओ कन्हैया आ जाओ कन्हैया | भगवान से रहा नही गया और अपने भक्त की ऐसी दशा देख कान्हा जी चल पड़े अपने भक्त के दुख नही देख सके और सब कुछ लूटने भगवान उस चोर के पास चल पड़े ! जैसे ही भगवान कान्हा जी वहा आये उन्हें देख वह चोर एक दम से उस झाड़ियों से बहार आ गया और उसने कान्हा को पकड़ लिया और कहने लगा कन्हैया तुम्हारे कारण मुझे इतना दर्द सहन करना पड़ा ! तेरे इंतज़ार मे मेरे रक्त निकल आये अब मै तुम्हें नही छोडूंगा ये देख मेरे हाथ मे हथियार है, ला मुझे अपने सारे आभूषण दे दे | भगवान चोर की बात सुन जोर जोर से हंसने लगे और अपने सारे आभूषण उस चोर को दे दिये| जब वह चोर वृंदावन से वापस अगले दिन अपने गाँव पहुंचा, तो सबसे पहले वह चोर उस पंडित जी के पास गया जो उस यजमान के यहा कथा सुना रहे थे, और अपने साथ जितने भी गहने वह चोरी करके लाया था उसका आधा उस पंडित जी को देकर पंडित के चरणों मे गिर गया | यह देख पंडित भी अचम्भित रह गये और पूछने लगे यह सब क्या है, तब वह चोर कहने लगा | पंडित जी आपने जिस कन्हैया का पता बताया था ना मै वही गया था और उस कान्हा को ही लूटकर आया हूँ, आपने बताया था इस हेतु आपको हिस्सा दे रहा हूँ | पंडित को यह सुन यकीन नहीं हुआ! और पंडित कहने लगे मै यहा लालो से पंडिताई कर रहा हूँ और मुझे आज तक कान्हा जी नही मिले और तुझ जैसे पापी को कान्हा कहाँ से मिल सकता है | चोर कहने लगा पंडित जी यह सत्य है यह सारे आभूषण सही कन्हैया के है इतना कहने पर पंडित बोलने लगे कि यदि ऐसा है तो चल में भी तेरे साथ चलता हूँ और देखता हूँ कि कान्हा कैसा दिखता है, और वो दोनों वृंदावन के लिये चल दिए! जैसे ही वह वृन्दावन पहुँचें तो चोर ने पंडित जी आओ मेरे साथ यहाँ छुप जाओ, पंडित जी उस चोर के साथ उसी झाड़ियों पर छुप गये और दोनों का शरीर रक्त निकलने लगे. और मुंह से बस कान्हा आ जाओ कान्हा आ जाओ निकलने लगे ! पुन भगवान पुन पँहुचे और चोर और पंडित दोनों झाड़ियों से बहार निकल आये! यह देख पंडित जी कि आँखों में आंसू थे और वह फूट फूट के रोने लगे | और चोर के चरणों में गिर के बोलने लगे जिसे देखने यह आँखें आज तक तरसते रहे थे, जो आज तक लोगो को लुटता आया हो, उसे आज तुमने लूट लिया तुम धन्य हो, आज तुम्हारी वजह से मुझे कान्हा के दर्शन हुए हैं | भक्ति की प्यास होनी चाहिये भगवान खुद ही किसी ना किसी स्वरूप मे अवश्य आते है | !!जय जय श्री राधे!!

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