Category: Nath Samaj

वल्लभाचार्य के द्वितीय पुत्र विट्ठलनाथ जी को गुंसाई (गोस्वामी) पदवी मिली

इतिहास माना जाता है, श्री वल्लभाचार्य जी को ही गोवर्धन पर्वत पर श्रीनाथ जी की मूर्ति मिली थी। इस सम्प्रदाय की प्रसिद्धि समय के साथ बढ़ती गई। पहली बार …

आर्थथ डेवट सिंधंत से निरुण अष्टधत्ता सलाह सिंध्ण की प्राप्ती हो सक्ति

श्री नाथ रहस्या (हिंदी संस्करण) ईश्वर ग्रंथ के साधना दवाने सगुन आर्थथ डेवट सिंधंत से निरुण अष्टधत्ता सलाह सिंध्ण की प्राप्ती हो सक्ति है। ग्रंथ की अंतरगढ़ देवी देवता …

ना कोई भ्राँत ‍लाऊँगा, अजर अमर का गोला गेरूँ पर्वत पहाड़ उठाऊँगा

गोरखनाथ का प्रिय मंत्र ‘जंजीरा’ ऊँ गुरुजी मैं सरभंगी सबका संगी, दूध-माँस का इकरंगी, अमर में एक तमर दरसे, तमर में एक झाँई, झाँई में पड़झाँई, दर से वहाँ …

गोरक्षनाथ की कथायें बडे सुचारु रुप से मिलती

नाथ सम्प्रदाय का परिचय यह सम्प्रदाय भारत का परम प्राचीन, उदार, ऊँच-नीच की भावना से परे एंव अवधूत अथवा योगियों का सम्प्रदाय है।इसका आरम्भ आदिनाथ शंकर से हुआ है …

ऊँ जय गोरक्ष देवा, श्री स्वामी जय गोरक्ष देवा।

श्री गोरक्षनाथ जी की आरती ऊँ जय गोरक्ष देवा, श्री स्वामी जय गोरक्ष देवा। सुर-नर मुनि जन ध्यावें, सन्त करत सेवा॥ ऊँ गुरुजी योगयुक्ति कर जानत, मानत ब्रह्म ज्ञानी। …

पूर्णब्रह्म सकल घटवासी, गोरक्षनाथ सकल प्रकाशी

श्री गोरक्ष-चालीसा जय जय जय गोरक्ष अविनाशी, कृपा करो गुरुदेव प्रकाशी । जय जय जय गोरक्ष गुणखानी, इच्छा रुप योगी वरदानी ॥ अलख निरंजन तुम्हरो नामा, सदा करो भक्तन …

गोरखनाथ से इस परम्परा को सुव्यवस्थित विस्तार मिला

गोरक्षनाथ के जन्मकाल पर विद्वानों में मतभेद हैं। राहुल सांकृत्यायन इनका जन्मकाल 845 ई. की 13वीं सदी का मानते हैं। नाथ परम्परा की शुरुआत बहुत प्राचीन रही है, किंतु …

अवधु अविगत से चल आया, कोई मेरा भेद मर्म नहीं पाया।।टेक।।

एक समय गोरख नाथ (सिद्ध महात्मा) काशी (बनारस) में स्वामी रामानन्द जी (जो साहेब कबीर के गुरु जी थे) से शास्त्रार्थ करने के लिए (ज्ञान गोष्टी के लिए) आए। …

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